व्रत और त्योहार — फ़रवरी 1995

इंदूर, Indore, Madhya Pradesh, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
04-02-1995
शनिवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष
माघ
त्योहार वसंत पंचमी
11-02-1995
शनिवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत जया एकादशी
12-02-1995
रविवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
13-02-1995
सोमवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
माघ
संक्रांति कुंभ संक्रांति · 05:05
15-02-1995
बुधवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत पूर्णिमा
18-02-1995
शनिवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
25-02-1995
शनिवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत विजया एकादशी
27-02-1995
सोमवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
त्योहार महाशिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) मेंव्रत सोम प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-02-1995 द्वितीया धनिष्ठा 07:06 18:14
02-02-1995 तृतीया शतभिषा 07:05 18:15
03-02-1995 चतुर्थी पूर्वा भाद्रपद 07:05 18:15
04-02-1995 पंचमी उत्तरा भाद्रपद 07:04 18:16
05-02-1995 षष्ठी रेवती 07:04 18:17
06-02-1995 सप्तमी अश्विनी 07:03 18:17
07-02-1995 अष्टमी भरणी 07:03 18:18
08-02-1995 अष्टमी कृत्तिका 07:02 18:19
09-02-1995 नवमी रोहिणी 07:02 18:19
10-02-1995 दशमी मृगशिरा 07:01 18:20
11-02-1995 एकादशी मृगशिरा 07:01 18:20
12-02-1995 द्वादशी आर्द्रा 07:00 18:21
13-02-1995 त्रयोदशी पुनर्वसु 07:00 18:21
14-02-1995 चतुर्दशी पुष्य 06:59 18:22
15-02-1995 पूर्णिमा आश्लेषा 06:58 18:23
16-02-1995 प्रतिपदा मघा 06:58 18:23
17-02-1995 द्वितीया पूर्वा फाल्गुनी 06:57 18:24
18-02-1995 तृतीया उत्तरा फाल्गुनी 06:56 18:24
19-02-1995 चतुर्थी हस्त 06:56 18:25
20-02-1995 पंचमी चित्रा 06:55 18:25
21-02-1995 षष्ठी स्वाति 06:54 18:26
22-02-1995 सप्तमी विशाखा 06:54 18:26
23-02-1995 नवमी ज्येष्ठा 06:53 18:27
24-02-1995 दशमी मूल 06:52 18:27
25-02-1995 एकादशी पूर्वाषाढ़ा 06:51 18:28
26-02-1995 द्वादशी उत्तराषाढ़ा 06:50 18:28
27-02-1995 त्रयोदशी श्रवण 06:50 18:29
28-02-1995 चतुर्दशी धनिष्ठा 06:49 18:29

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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