व्रत और त्योहार — मार्च 2057

जयपुर, Jaipur, Rajasthan, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
01-03-2057
गुरुवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत विजया एकादशी
03-03-2057
शनिवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
त्योहार महाशिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) मेंव्रत शनि प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
05-03-2057
सोमवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत अमावस्या
14-03-2057
बुधवार
नवमी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
संक्रांति मीन संक्रांति · 23:39
17-03-2057
शनिवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
व्रत आमलकी एकादशी
18-03-2057
रविवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
20-03-2057
मंगलवार
चतुर्दशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
त्योहार होलिका दहन · प्रदोष काल में
21-03-2057
बुधवार
प्रतिपदा, कृष्ण पक्ष
चैत्र
त्योहार होली
31-03-2057
शनिवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
चैत्र
व्रत पापमोचनी एकादशी
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-03-2057 एकादशी पूर्वाषाढ़ा 06:50 18:28
02-03-2057 द्वादशी उत्तराषाढ़ा 06:49 18:28
03-03-2057 त्रयोदशी श्रवण 06:48 18:29
04-03-2057 चतुर्दशी धनिष्ठा 06:47 18:29
05-03-2057 अमावस्या शतभिषा 06:46 18:30
06-03-2057 प्रतिपदा पूर्वा भाद्रपद 06:45 18:30
07-03-2057 द्वितीया उत्तरा भाद्रपद 06:44 18:31
08-03-2057 तृतीया रेवती 06:43 18:32
09-03-2057 चतुर्थी अश्विनी 06:42 18:32
10-03-2057 पंचमी भरणी 06:41 18:33
11-03-2057 षष्ठी कृत्तिका 06:40 18:33
12-03-2057 सप्तमी रोहिणी 06:39 18:34
13-03-2057 अष्टमी मृगशिरा 06:38 18:34
14-03-2057 नवमी मृगशिरा 06:36 18:35
15-03-2057 नवमी आर्द्रा 06:35 18:35
16-03-2057 दशमी पुनर्वसु 06:34 18:36
17-03-2057 एकादशी पुष्य 06:33 18:36
18-03-2057 द्वादशी आश्लेषा 06:32 18:37
19-03-2057 त्रयोदशी मघा 06:31 18:37
20-03-2057 चतुर्दशी पूर्वा फाल्गुनी 06:30 18:38
21-03-2057 प्रतिपदा उत्तरा फाल्गुनी 06:29 18:38
22-03-2057 द्वितीया हस्त 06:28 18:39
23-03-2057 तृतीया चित्रा 06:27 18:39
24-03-2057 चतुर्थी स्वाति 06:26 18:40
25-03-2057 पंचमी अनुराधा 06:24 18:40
26-03-2057 षष्ठी ज्येष्ठा 06:23 18:41
27-03-2057 सप्तमी मूल 06:22 18:41
28-03-2057 अष्टमी पूर्वाषाढ़ा 06:21 18:42
29-03-2057 नवमी उत्तराषाढ़ा 06:20 18:42
30-03-2057 दशमी श्रवण 06:19 18:43
31-03-2057 एकादशी धनिष्ठा 06:18 18:43

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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