व्रत और त्योहार — फ़रवरी 1953

Rājkot, Gujarat, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
02-02-1953
सोमवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
10-02-1953
मंगलवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत विजया एकादशी
11-02-1953
बुधवार
द्वादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
12-02-1953
गुरुवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
त्योहार महाशिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) मेंसंक्रांति कुंभ संक्रांति · 10:45
24-02-1953
मंगलवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
व्रत आमलकी एकादशी
25-02-1953
बुधवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
28-02-1953
शनिवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
त्योहार होलिका दहन · प्रदोष काल मेंव्रत पूर्णिमा
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-02-1953 द्वितीया मघा 07:25 18:35
02-02-1953 तृतीया पूर्वा फाल्गुनी 07:25 18:36
03-02-1953 चतुर्थी उत्तरा फाल्गुनी 07:24 18:36
04-02-1953 पंचमी हस्त 07:24 18:37
05-02-1953 षष्ठी चित्रा 07:23 18:38
06-02-1953 सप्तमी स्वाति 07:23 18:38
07-02-1953 अष्टमी विशाखा 07:23 18:39
08-02-1953 नवमी अनुराधा 07:22 18:39
09-02-1953 दशमी ज्येष्ठा 07:22 18:40
10-02-1953 एकादशी मूल 07:21 18:41
11-02-1953 द्वादशी पूर्वाषाढ़ा 07:20 18:41
12-02-1953 त्रयोदशी उत्तराषाढ़ा 07:20 18:42
13-02-1953 चतुर्दशी श्रवण 07:19 18:42
14-02-1953 प्रतिपदा धनिष्ठा 07:19 18:43
15-02-1953 द्वितीया शतभिषा 07:18 18:43
16-02-1953 तृतीया पूर्वा भाद्रपद 07:17 18:44
17-02-1953 चतुर्थी रेवती 07:17 18:44
18-02-1953 पंचमी अश्विनी 07:16 18:45
19-02-1953 षष्ठी भरणी 07:15 18:45
20-02-1953 सप्तमी कृत्तिका 07:15 18:46
21-02-1953 अष्टमी रोहिणी 07:14 18:46
22-02-1953 नवमी मृगशिरा 07:13 18:47
23-02-1953 दशमी आर्द्रा 07:13 18:47
24-02-1953 एकादशी पुनर्वसु 07:12 18:48
25-02-1953 द्वादशी पुनर्वसु 07:11 18:48
26-02-1953 त्रयोदशी पुष्य 07:10 18:49
27-02-1953 चतुर्दशी आश्लेषा 07:09 18:49
28-02-1953 पूर्णिमा मघा 07:09 18:50

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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