व्रत और त्योहार — नवंबर 2066

भोपाल, Bhopāl, Madhya Pradesh, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
02-11-2066
मंगलवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
कार्तिक
त्योहार कार्तिक पूर्णिमा · गुरु नानक जयंती · देव दीपावलीव्रत पूर्णिमा
05-11-2066
शुक्रवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
13-11-2066
शनिवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत उत्पन्ना एकादशी
15-11-2066
सोमवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत सोम प्रदोष व्रत · प्रदोष काल मेंव्रत मासिक शिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
17-11-2066
बुधवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत अमावस्यासंक्रांति वृश्चिक संक्रांति · 01:58
27-11-2066
शनिवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
त्योहार गीता जयंतीव्रत मोक्षदा एकादशी
29-11-2066
सोमवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत सोम प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-11-2066 चतुर्दशी अश्विनी 06:25 17:42
02-11-2066 पूर्णिमा भरणी 06:25 17:41
03-11-2066 प्रतिपदा कृत्तिका 06:26 17:40
04-11-2066 द्वितीया कृत्तिका 06:27 17:40
05-11-2066 तृतीया रोहिणी 06:27 17:39
06-11-2066 चतुर्थी मृगशिरा 06:28 17:39
07-11-2066 पंचमी आर्द्रा 06:28 17:38
08-11-2066 षष्ठी पुनर्वसु 06:29 17:38
09-11-2066 सप्तमी पुष्य 06:30 17:37
10-11-2066 अष्टमी आश्लेषा 06:30 17:37
11-11-2066 नवमी मघा 06:31 17:37
12-11-2066 दशमी पूर्वा फाल्गुनी 06:31 17:36
13-11-2066 एकादशी उत्तरा फाल्गुनी 06:32 17:36
14-11-2066 द्वादशी हस्त 06:33 17:36
15-11-2066 त्रयोदशी चित्रा 06:33 17:35
16-11-2066 चतुर्दशी स्वाति 06:34 17:35
17-11-2066 अमावस्या विशाखा 06:35 17:35
18-11-2066 प्रतिपदा अनुराधा 06:35 17:34
19-11-2066 द्वितीया ज्येष्ठा 06:36 17:34
20-11-2066 तृतीया मूल 06:37 17:34
21-11-2066 पंचमी पूर्वाषाढ़ा 06:37 17:34
22-11-2066 षष्ठी उत्तराषाढ़ा 06:38 17:34
23-11-2066 सप्तमी श्रवण 06:39 17:34
24-11-2066 अष्टमी धनिष्ठा 06:39 17:33
25-11-2066 नवमी शतभिषा 06:40 17:33
26-11-2066 दशमी पूर्वा भाद्रपद 06:41 17:33
27-11-2066 एकादशी उत्तरा भाद्रपद 06:41 17:33
28-11-2066 द्वादशी रेवती 06:42 17:33
29-11-2066 त्रयोदशी अश्विनी 06:43 17:33
30-11-2066 चतुर्दशी भरणी 06:44 17:33

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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