व्रत और त्योहार — जनवरी 1942

दिल्ली, Delhi, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
02-01-1942
शुक्रवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत पूर्णिमा
06-01-1942
मंगलवार
चतुर्थी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
13-01-1942
मंगलवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत षटतिला एकादशी
14-01-1942
बुधवार
द्वादशी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल मेंसंक्रांति मकर संक्रांति · 03:03
15-01-1942
गुरुवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत मासिक शिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
16-01-1942
शुक्रवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत अमावस्या
21-01-1942
बुधवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष
माघ
त्योहार वसंत पंचमी
27-01-1942
मंगलवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत जया एकादशी
29-01-1942
गुरुवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-01-1942 चतुर्दशी मृगशिरा 08:13 18:35
02-01-1942 पूर्णिमा आर्द्रा 08:13 18:35
03-01-1942 प्रतिपदा पुनर्वसु 08:14 18:36
04-01-1942 द्वितीया पुष्य 08:14 18:37
05-01-1942 तृतीया आश्लेषा 08:14 18:38
06-01-1942 चतुर्थी मघा 08:14 18:38
07-01-1942 पंचमी पूर्वा फाल्गुनी 08:14 18:39
08-01-1942 षष्ठी उत्तरा फाल्गुनी 08:14 18:40
09-01-1942 सप्तमी हस्त 08:15 18:41
10-01-1942 अष्टमी चित्रा 08:15 18:41
11-01-1942 नवमी स्वाति 08:15 18:42
12-01-1942 दशमी विशाखा 08:15 18:43
13-01-1942 एकादशी अनुराधा 08:15 18:44
14-01-1942 द्वादशी ज्येष्ठा 08:15 18:45
15-01-1942 त्रयोदशी मूल 08:14 18:45
16-01-1942 अमावस्या पूर्वाषाढ़ा 08:14 18:46
17-01-1942 प्रतिपदा उत्तराषाढ़ा 08:14 18:47
18-01-1942 द्वितीया श्रवण 08:14 18:48
19-01-1942 तृतीया धनिष्ठा 08:14 18:49
20-01-1942 चतुर्थी शतभिषा 08:14 18:50
21-01-1942 पंचमी पूर्वा भाद्रपद 08:13 18:50
22-01-1942 षष्ठी उत्तरा भाद्रपद 08:13 18:51
23-01-1942 सप्तमी रेवती 08:13 18:52
24-01-1942 अष्टमी अश्विनी 08:13 18:53
25-01-1942 नवमी भरणी 08:12 18:54
26-01-1942 दशमी कृत्तिका 08:12 18:55
27-01-1942 एकादशी रोहिणी 08:11 18:55
28-01-1942 एकादशी मृगशिरा 08:11 18:56
29-01-1942 द्वादशी आर्द्रा 08:11 18:57
30-01-1942 त्रयोदशी आर्द्रा 08:10 18:58
31-01-1942 चतुर्दशी पुनर्वसु 08:10 18:59

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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