व्रत और त्योहार — जनवरी 1944

जयपुर, Jaipur, Rajasthan, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
06-01-1944
गुरुवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत पौष पुत्रदा एकादशी
07-01-1944
शुक्रवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
10-01-1944
सोमवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत पूर्णिमा
14-01-1944
शुक्रवार
चतुर्थी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय परसंक्रांति मकर संक्रांति · 15:18
22-01-1944
शनिवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत षटतिला एकादशी
23-01-1944
रविवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
25-01-1944
मंगलवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत अमावस्या
29-01-1944
शनिवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष
माघ
त्योहार वसंत पंचमी
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-01-1944 षष्ठी पूर्वा भाद्रपद 08:15 18:44
02-01-1944 सप्तमी उत्तरा भाद्रपद 08:15 18:45
03-01-1944 अष्टमी रेवती 08:16 18:45
04-01-1944 नवमी अश्विनी 08:16 18:46
05-01-1944 दशमी भरणी 08:16 18:47
06-01-1944 एकादशी कृत्तिका 08:16 18:47
07-01-1944 द्वादशी रोहिणी 08:16 18:48
08-01-1944 त्रयोदशी मृगशिरा 08:17 18:49
09-01-1944 चतुर्दशी आर्द्रा 08:17 18:50
10-01-1944 पूर्णिमा पुनर्वसु 08:17 18:50
11-01-1944 प्रतिपदा पुष्य 08:17 18:51
12-01-1944 द्वितीया पुष्य 08:17 18:52
13-01-1944 तृतीया आश्लेषा 08:17 18:53
14-01-1944 चतुर्थी मघा 08:17 18:53
15-01-1944 पंचमी पूर्वा फाल्गुनी 08:17 18:54
16-01-1944 षष्ठी उत्तरा फाल्गुनी 08:17 18:55
17-01-1944 सप्तमी हस्त 08:17 18:56
18-01-1944 सप्तमी चित्रा 08:17 18:57
19-01-1944 अष्टमी स्वाति 08:16 18:57
20-01-1944 नवमी विशाखा 08:16 18:58
21-01-1944 दशमी अनुराधा 08:16 18:59
22-01-1944 एकादशी ज्येष्ठा 08:16 19:00
23-01-1944 त्रयोदशी मूल 08:16 19:01
24-01-1944 चतुर्दशी पूर्वाषाढ़ा 08:15 19:01
25-01-1944 अमावस्या उत्तराषाढ़ा 08:15 19:02
26-01-1944 प्रतिपदा श्रवण 08:15 19:03
27-01-1944 द्वितीया धनिष्ठा 08:14 19:04
28-01-1944 तृतीया शतभिषा 08:14 19:05
29-01-1944 पंचमी पूर्वा भाद्रपद 08:14 19:05
30-01-1944 षष्ठी रेवती 08:13 19:06
31-01-1944 सप्तमी अश्विनी 08:13 19:07

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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