व्रत और त्योहार — जनवरी 2043

जयपुर, Jaipur, Rajasthan, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
06-01-2043
मंगलवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
पौष
व्रत सफला एकादशी
08-01-2043
गुरुवार
द्वादशी, कृष्ण पक्ष
पौष
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
09-01-2043
शुक्रवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
पौष
व्रत मासिक शिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
11-01-2043
रविवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
पौष
व्रत अमावस्या
14-01-2043
बुधवार
तृतीया, शुक्ल पक्ष
पौष
संक्रांति मकर संक्रांति · 23:34
21-01-2043
बुधवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत पौष पुत्रदा एकादशी
22-01-2043
गुरुवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
25-01-2043
रविवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
पौष
व्रत पूर्णिमा
28-01-2043
बुधवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
माघ
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-01-2043 षष्ठी पूर्वा फाल्गुनी 07:15 17:44
02-01-2043 सप्तमी उत्तरा फाल्गुनी 07:15 17:45
03-01-2043 अष्टमी हस्त 07:16 17:46
04-01-2043 नवमी चित्रा 07:16 17:47
05-01-2043 दशमी स्वाति 07:16 17:47
06-01-2043 एकादशी विशाखा 07:16 17:48
07-01-2043 एकादशी अनुराधा 07:16 17:49
08-01-2043 द्वादशी अनुराधा 07:16 17:49
09-01-2043 त्रयोदशी ज्येष्ठा 07:17 17:50
10-01-2043 चतुर्दशी मूल 07:17 17:51
11-01-2043 अमावस्या पूर्वाषाढ़ा 07:17 17:52
12-01-2043 प्रतिपदा उत्तराषाढ़ा 07:17 17:53
13-01-2043 द्वितीया श्रवण 07:17 17:53
14-01-2043 तृतीया धनिष्ठा 07:17 17:54
15-01-2043 चतुर्थी शतभिषा 07:17 17:55
16-01-2043 षष्ठी पूर्वा भाद्रपद 07:16 17:56
17-01-2043 सप्तमी उत्तरा भाद्रपद 07:16 17:56
18-01-2043 अष्टमी रेवती 07:16 17:57
19-01-2043 नवमी भरणी 07:16 17:58
20-01-2043 दशमी कृत्तिका 07:16 17:59
21-01-2043 एकादशी रोहिणी 07:16 18:00
22-01-2043 द्वादशी मृगशिरा 07:15 18:00
23-01-2043 त्रयोदशी आर्द्रा 07:15 18:01
24-01-2043 चतुर्दशी पुनर्वसु 07:15 18:02
25-01-2043 पूर्णिमा पुष्य 07:15 18:03
26-01-2043 प्रतिपदा आश्लेषा 07:14 18:04
27-01-2043 द्वितीया मघा 07:14 18:04
28-01-2043 तृतीया पूर्वा फाल्गुनी 07:14 18:05
29-01-2043 चतुर्थी उत्तरा फाल्गुनी 07:13 18:06
30-01-2043 पंचमी हस्त 07:13 18:07
31-01-2043 षष्ठी चित्रा 07:12 18:07

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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