व्रत और त्योहार — फ़रवरी 1938

लखनऊ, Lucknow District, Uttar Pradesh, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
05-02-1938
शनिवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष
माघ
त्योहार वसंत पंचमी
11-02-1938
शुक्रवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत जया एकादशी
12-02-1938
शनिवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत शनि प्रदोष व्रत · प्रदोष काल मेंसंक्रांति कुंभ संक्रांति · 14:19
14-02-1938
सोमवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत पूर्णिमा
17-02-1938
गुरुवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
25-02-1938
शुक्रवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत विजया एकादशी
27-02-1938
रविवार
द्वादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
28-02-1938
सोमवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
त्योहार महाशिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-02-1938 प्रतिपदा धनिष्ठा 06:52 17:48
02-02-1938 द्वितीया शतभिषा 06:51 17:48
03-02-1938 तृतीया शतभिषा 06:51 17:49
04-02-1938 चतुर्थी पूर्वा भाद्रपद 06:50 17:50
05-02-1938 पंचमी उत्तरा भाद्रपद 06:49 17:51
06-02-1938 षष्ठी रेवती 06:49 17:51
07-02-1938 सप्तमी अश्विनी 06:48 17:52
08-02-1938 अष्टमी भरणी 06:48 17:53
09-02-1938 नवमी रोहिणी 06:47 17:54
10-02-1938 दशमी मृगशिरा 06:46 17:54
11-02-1938 एकादशी आर्द्रा 06:46 17:55
12-02-1938 द्वादशी पुनर्वसु 06:45 17:56
13-02-1938 चतुर्दशी पुष्य 06:44 17:56
14-02-1938 पूर्णिमा आश्लेषा 06:44 17:57
15-02-1938 प्रतिपदा मघा 06:43 17:58
16-02-1938 द्वितीया पूर्वा फाल्गुनी 06:42 17:58
17-02-1938 तृतीया उत्तरा फाल्गुनी 06:41 17:59
18-02-1938 चतुर्थी हस्त 06:40 18:00
19-02-1938 पंचमी चित्रा 06:40 18:00
20-02-1938 षष्ठी स्वाति 06:39 18:01
21-02-1938 सप्तमी विशाखा 06:38 18:02
22-02-1938 अष्टमी अनुराधा 06:37 18:02
23-02-1938 नवमी ज्येष्ठा 06:36 18:03
24-02-1938 दशमी मूल 06:35 18:04
25-02-1938 एकादशी पूर्वाषाढ़ा 06:34 18:04
26-02-1938 एकादशी पूर्वाषाढ़ा 06:33 18:05
27-02-1938 द्वादशी उत्तराषाढ़ा 06:32 18:05
28-02-1938 त्रयोदशी श्रवण 06:32 18:06

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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