व्रत और त्योहार — मार्च 1945

लखनऊ, Lucknow District, Uttar Pradesh, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
02-03-1945
शुक्रवार
तृतीया, कृष्ण पक्ष
चैत्र
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
10-03-1945
शनिवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
चैत्र
व्रत पापमोचनी एकादशी
12-03-1945
सोमवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
चैत्र
व्रत मासिक शिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
14-03-1945
बुधवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
चैत्र
व्रत अमावस्यासंक्रांति मीन संक्रांति · 07:23
24-03-1945
शनिवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
चैत्र (अधिक)
व्रत पद्मिनी एकादशी
25-03-1945
रविवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
चैत्र (अधिक)
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
28-03-1945
बुधवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
चैत्र (अधिक)
व्रत पूर्णिमा
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-03-1945 द्वितीया उत्तरा फाल्गुनी 07:30 19:07
02-03-1945 तृतीया हस्त 07:29 19:07
03-03-1945 चतुर्थी चित्रा 07:28 19:08
04-03-1945 पंचमी स्वाति 07:27 19:08
05-03-1945 षष्ठी विशाखा 07:26 19:09
06-03-1945 सप्तमी अनुराधा 07:25 19:10
07-03-1945 अष्टमी ज्येष्ठा 07:24 19:10
08-03-1945 नवमी मूल 07:23 19:11
09-03-1945 दशमी पूर्वाषाढ़ा 07:22 19:11
10-03-1945 एकादशी उत्तराषाढ़ा 07:21 19:12
11-03-1945 द्वादशी श्रवण 07:20 19:12
12-03-1945 त्रयोदशी धनिष्ठा 07:19 19:13
13-03-1945 चतुर्दशी शतभिषा 07:18 19:13
14-03-1945 अमावस्या पूर्वा भाद्रपद 07:17 19:14
15-03-1945 द्वितीया उत्तरा भाद्रपद 07:16 19:14
16-03-1945 तृतीया रेवती 07:15 19:15
17-03-1945 चतुर्थी भरणी 07:14 19:15
18-03-1945 पंचमी कृत्तिका 07:13 19:16
19-03-1945 षष्ठी रोहिणी 07:11 19:16
20-03-1945 सप्तमी मृगशिरा 07:10 19:17
21-03-1945 अष्टमी आर्द्रा 07:09 19:17
22-03-1945 नवमी पुनर्वसु 07:08 19:18
23-03-1945 दशमी पुष्य 07:07 19:18
24-03-1945 एकादशी आश्लेषा 07:06 19:19
25-03-1945 द्वादशी मघा 07:05 19:19
26-03-1945 त्रयोदशी मघा 07:04 19:20
27-03-1945 चतुर्दशी पूर्वा फाल्गुनी 07:03 19:20
28-03-1945 पूर्णिमा उत्तरा फाल्गुनी 07:02 19:21
29-03-1945 प्रतिपदा हस्त 07:01 19:21
30-03-1945 द्वितीया चित्रा 06:59 19:22
31-03-1945 तृतीया स्वाति 06:58 19:22

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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