व्रत और त्योहार — दिसंबर 2034

मीरत, Meerut, Uttar Pradesh, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
06-12-2034
बुधवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत उत्पन्ना एकादशी
08-12-2034
शुक्रवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल मेंव्रत मासिक शिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
10-12-2034
रविवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत अमावस्या
16-12-2034
शनिवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
संक्रांति धनु संक्रांति · 11:42
21-12-2034
गुरुवार
दशमी, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
त्योहार गीता जयंती
23-12-2034
शनिवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत शनि प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
25-12-2034
सोमवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
मार्गशीर्ष
व्रत पूर्णिमा
28-12-2034
गुरुवार
चतुर्थी, कृष्ण पक्ष
पौष
व्रत संकष्टी चतुर्थी · चंद्रोदय पर
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-12-2034 षष्ठी आश्लेषा 06:54 17:21
02-12-2034 सप्तमी मघा 06:55 17:21
03-12-2034 अष्टमी पूर्वा फाल्गुनी 06:56 17:21
04-12-2034 नवमी उत्तरा फाल्गुनी 06:57 17:21
05-12-2034 दशमी हस्त 06:57 17:21
06-12-2034 एकादशी चित्रा 06:58 17:21
07-12-2034 द्वादशी स्वाति 06:59 17:21
08-12-2034 त्रयोदशी विशाखा 06:59 17:21
09-12-2034 चतुर्दशी अनुराधा 07:00 17:22
10-12-2034 अमावस्या अनुराधा 07:01 17:22
11-12-2034 प्रतिपदा ज्येष्ठा 07:02 17:22
12-12-2034 द्वितीया मूल 07:02 17:22
13-12-2034 तृतीया पूर्वाषाढ़ा 07:03 17:23
14-12-2034 तृतीया उत्तराषाढ़ा 07:04 17:23
15-12-2034 चतुर्थी श्रवण 07:04 17:23
16-12-2034 पंचमी धनिष्ठा 07:05 17:24
17-12-2034 षष्ठी शतभिषा 07:05 17:24
18-12-2034 सप्तमी पूर्वा भाद्रपद 07:06 17:24
19-12-2034 अष्टमी उत्तरा भाद्रपद 07:07 17:25
20-12-2034 नवमी रेवती 07:07 17:25
21-12-2034 दशमी अश्विनी 07:08 17:26
22-12-2034 द्वादशी भरणी 07:08 17:26
23-12-2034 त्रयोदशी कृत्तिका 07:09 17:27
24-12-2034 चतुर्दशी रोहिणी 07:09 17:27
25-12-2034 पूर्णिमा मृगशिरा 07:09 17:28
26-12-2034 प्रतिपदा आर्द्रा 07:10 17:28
27-12-2034 द्वितीया पुष्य 07:10 17:29
28-12-2034 चतुर्थी आश्लेषा 07:11 17:30
29-12-2034 पंचमी मघा 07:11 17:30
30-12-2034 षष्ठी पूर्वा फाल्गुनी 07:11 17:31
31-12-2034 सप्तमी उत्तरा फाल्गुनी 07:12 17:32

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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