व्रत और त्योहार — फ़रवरी 1941

सुरत, Sūrat, Gujarat, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
01-02-1941
शनिवार
पंचमी, शुक्ल पक्ष
माघ
त्योहार वसंत पंचमी
08-02-1941
शनिवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत जया एकादशी
09-02-1941
रविवार
द्वादशी, शुक्ल पक्ष
माघ
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
12-02-1941
बुधवार
प्रतिपदा, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
संक्रांति कुंभ संक्रांति · 08:50
22-02-1941
शनिवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत विजया एकादशी
23-02-1941
रविवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
24-02-1941
सोमवार
चतुर्दशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
त्योहार महाशिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
26-02-1941
बुधवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत अमावस्या
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-02-1941 पंचमी उत्तरा भाद्रपद 07:15 18:28
02-02-1941 षष्ठी रेवती 07:15 18:29
03-02-1941 सप्तमी अश्विनी 07:15 18:30
04-02-1941 अष्टमी भरणी 07:14 18:30
05-02-1941 नवमी कृत्तिका 07:14 18:31
06-02-1941 नवमी रोहिणी 07:14 18:31
07-02-1941 दशमी मृगशिरा 07:13 18:32
08-02-1941 एकादशी मृगशिरा 07:13 18:33
09-02-1941 द्वादशी आर्द्रा 07:12 18:33
10-02-1941 त्रयोदशी पुनर्वसु 07:12 18:34
11-02-1941 चतुर्दशी पुष्य 07:11 18:34
12-02-1941 प्रतिपदा मघा 07:11 18:35
13-02-1941 द्वितीया पूर्वा फाल्गुनी 07:10 18:35
14-02-1941 तृतीया उत्तरा फाल्गुनी 07:09 18:36
15-02-1941 चतुर्थी हस्त 07:09 18:36
16-02-1941 पंचमी चित्रा 07:08 18:37
17-02-1941 षष्ठी स्वाति 07:08 18:37
18-02-1941 सप्तमी विशाखा 07:07 18:38
19-02-1941 अष्टमी अनुराधा 07:06 18:38
20-02-1941 नवमी ज्येष्ठा 07:06 18:39
21-02-1941 दशमी मूल 07:05 18:39
22-02-1941 एकादशी पूर्वाषाढ़ा 07:04 18:40
23-02-1941 त्रयोदशी उत्तराषाढ़ा 07:04 18:40
24-02-1941 चतुर्दशी श्रवण 07:03 18:41
25-02-1941 चतुर्दशी धनिष्ठा 07:02 18:41
26-02-1941 अमावस्या शतभिषा 07:01 18:41
27-02-1941 प्रतिपदा पूर्वा भाद्रपद 07:01 18:42
28-02-1941 द्वितीया उत्तरा भाद्रपद 07:00 18:42

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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