व्रत और त्योहार — फ़रवरी 1945

सुरत, Sūrat, Gujarat, India

इस माह

तिथि सूर्योदय पर तिथि व्रत / त्योहार
08-02-1945
गुरुवार
एकादशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत विजया एकादशी
10-02-1945
शनिवार
त्रयोदशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत शनि प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
11-02-1945
रविवार
चतुर्दशी, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
त्योहार महाशिवरात्रि · निशीथ काल (मध्यरात्रि) में
12-02-1945
सोमवार
अमावस्या, कृष्ण पक्ष
फाल्गुन
व्रत अमावस्यासंक्रांति कुंभ संक्रांति · 10:27
22-02-1945
गुरुवार
एकादशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
व्रत आमलकी एकादशी
24-02-1945
शनिवार
त्रयोदशी, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
व्रत शनि प्रदोष व्रत · प्रदोष काल में
26-02-1945
सोमवार
पूर्णिमा, शुक्ल पक्ष
फाल्गुन
त्योहार होलिका दहन · प्रदोष काल मेंव्रत पूर्णिमा
27-02-1945
मंगलवार
प्रतिपदा, कृष्ण पक्ष
चैत्र
त्योहार होली
माह के सभी दिन
तिथितिथिनक्षत्रसूर्योदयसूर्यास्त
01-02-1945 चतुर्थी उत्तरा फाल्गुनी 08:15 19:28
02-02-1945 पंचमी हस्त 08:15 19:29
03-02-1945 षष्ठी चित्रा 08:15 19:30
04-02-1945 सप्तमी स्वाति 08:14 19:30
05-02-1945 अष्टमी स्वाति 08:14 19:31
06-02-1945 नवमी विशाखा 08:14 19:31
07-02-1945 दशमी अनुराधा 08:13 19:32
08-02-1945 एकादशी ज्येष्ठा 08:13 19:33
09-02-1945 द्वादशी मूल 08:12 19:33
10-02-1945 त्रयोदशी पूर्वाषाढ़ा 08:12 19:34
11-02-1945 चतुर्दशी उत्तराषाढ़ा 08:11 19:34
12-02-1945 अमावस्या श्रवण 08:11 19:35
13-02-1945 प्रतिपदा धनिष्ठा 08:10 19:35
14-02-1945 द्वितीया पूर्वा भाद्रपद 08:09 19:36
15-02-1945 तृतीया उत्तरा भाद्रपद 08:09 19:36
16-02-1945 चतुर्थी रेवती 08:08 19:37
17-02-1945 पंचमी अश्विनी 08:08 19:37
18-02-1945 सप्तमी भरणी 08:07 19:38
19-02-1945 अष्टमी कृत्तिका 08:06 19:38
20-02-1945 नवमी रोहिणी 08:06 19:39
21-02-1945 दशमी मृगशिरा 08:05 19:39
22-02-1945 एकादशी आर्द्रा 08:04 19:40
23-02-1945 द्वादशी पुनर्वसु 08:04 19:40
24-02-1945 त्रयोदशी पुष्य 08:03 19:41
25-02-1945 चतुर्दशी आश्लेषा 08:02 19:41
26-02-1945 पूर्णिमा मघा 08:01 19:41
27-02-1945 प्रतिपदा पूर्वा फाल्गुनी 08:01 19:42
28-02-1945 प्रतिपदा उत्तरा फाल्गुनी 08:00 19:42

मास उत्तर भारत की पूर्णिमांत पद्धति से हैं; कृष्ण पक्ष पूर्णिमा के बाद वाले मास का माना जाता है। त्योहार उस दिन माना गया है जब उसके पालन के समय वह तिथि हो — अधिकतर सूर्योदय पर, दीपावली और होलिका दहन प्रदोष में, जन्माष्टमी और शिवरात्रि मध्यरात्रि में, करवा चौथ चंद्रोदय पर — और स्थानीय परंपरा में कभी एक दिन का अंतर हो सकता है। संदेह हो तो अपने पुरोहित से पूछें।

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