पुखराज
पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है — ज्ञान, गुरु, संतान और भाग्य का कारक।
किसके लिए सुझाया जाता है?
सामान्यतः तब सुझाया जाता है जब गुरु लग्नेश, पंचमेश या नवमेश हो, अथवा शुभ भाव में होकर निर्बल हो।
किससे जोड़ा जाता है
परंपरा में इसे आत्मविश्वास, शिक्षा, कन्या के विवाह योग और आर्थिक स्थिरता से जोड़ा जाता है।
सावधानी: यदि गुरु आपकी कुंडली में 6, 8 या 12वें भाव का स्वामी हो तो सामान्यतः नहीं पहनाया जाता।
परंपरागत रूप से कैसे धारण करें
- ग्रह
- गुरु
- अन्य नाम
- गुरु रत्न, येलो सफायर
- धातु
- सोना
- उंगली
- तर्जनी
- दिन व समय
- गुरुवार प्रातःकाल
- वजन
- सामान्यतः 3–7 रत्ती, ज्योतिषी के अनुसार
- मंत्र
- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
धारण से पूर्व अंगूठी को कच्चे दूध व स्वच्छ जल से धोकर मंत्र का 108 बार जाप करें — यह सामान्य विधि है, अनिवार्य नियम नहीं।
यह रत्न आपके लिए उपयुक्त है या नहीं, यह आपकी जन्म कुंडली पर निर्भर करता है — ग्रह किस भाव का स्वामी है, उसका बल और वर्तमान दशा। मुफ्त कुंडली बनाकर देखें कि आपकी कुंडली किन रत्नों की ओर संकेत करती है।